Description
खुशबू चंद्रवंशी को भारतीय संविधान और समाज से जुड़े विषयों को पढ़ना, समझना और उन पर विचार करना प्रिय है। इस पुस्तक में उन्होंने संविधान को सरल, सहज और कहानी-शैली में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, ताकि प्रत्येक पाठक इसे बिना भय और उलझन के आत्मीयता के साथ पढ़ सके। यह उनकी प्रथम कृति है, जिसके माध्यम से वे चाहती हैं कि संविधान सबके लिए समझने योग्य और अपना-सा अनुभव हो।
भारत का संविधान केवल कानूनों का संकलन नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के संघर्ष, सपनों और संकल्पों की जीवंत कहानी है। “संविधान – एक कहानी, एक सफर” इस महान दस्तावेज की ऐतिहासिक यात्रा को सरल, रोचक और भावनात्मक शैली में प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक 26 नवंबर 1949 से 26 जनवरी 1950 तक के ऐतिहासिक पड़ावों, संविधान सभा की बहसों, डॉ. भीमराव अंबेडकर और अन्य निर्माताओं के योगदान को कहानी के रूप में सामने लाती है। इसमें बताया गया है कि कैसे स्वतंत्र भारत ने विविधता में एकता को स्वीकार करते हुए एक लोकतांत्रिक, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य का स्वरूप अपनाया।
मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्यों की व्याख्या केवल कानूनी भाषा में नहीं, बल्कि जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से की गई है, ताकि पाठक संविधान को समझे ही नहीं, बल्कि उसे महसूस भी कर सके।
यह पुस्तक विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों तथा प्रत्येक जागरूक नागरिक के लिए समान रूप से उपयोगी है। “संविधान रू एक कहानी, एक सफर” हमें यह एहसास कराती है कि संविधान केवल किताबों में नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और रोजमर्रा के जीवन में धड़कता है।




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